संघर्ष और जिद

मई 6, 2009

मैं जानता हूँ कि इस घुप अंधेरे के पीछे कहीं मेरा सूरज छिपा है
बस अभी आजाएगा रौशनी फैलाते हुए

मुझे मालुम है कि इस तपते रेगिस्तान के पास कहीं, एक नदी का हरा भरा किनारा है
बस अभी महसूस होगा, हवाएं ठंडी बहाते हुए

मेरे ये हताश, निराश कदम एक छलावा हैं खुद मेरे ही लिए
मैं पाया था खुदको, कल अपनी ही हंसी बनाते हुए

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29 Responses to “संघर्ष और जिद”


  1. हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.


  2. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है. हिंदी में लिखते है अछा लगता है


  3. सुन्दर! आशावादी बनें रहें!

  4. Dr Vishwas Saxena Says:

    hello rahul
    I am extremely happy to view a positive attitude in your poem.I am still more happy that visiting compositions of as many as 10 poets I found you only oriented towards positive approach in extreme adversities.May God bless you and render success in you every endeavour.Love
    Dr Vishwas Saxena ‘devil’
    09414550982

  5. Dr Vishwas Saxena Says:

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    Dr Vishwas Saxena ‘devil’
    09414550982

  6. Jai Says:

    Sahi hai. keep it up. Achha lagta hai, hansi ko wapas “kheench” kar la rahe ho. Likhte raho

  7. Rachana Gaur Bharti Says:

    बे्हतरीन रचना के लिये बधाई। यदि शब्द न होते तो एह्सास भी न होता। मेरे ब्लोग पर आपका स्वागत है। लिखते रहें हमारी शुभकामनाएं साथ है।

  8. संगीता पुरी Says:

    बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।


    • आपका बहुत बहुत धन्यवाद. हिंदी ब्लॉग पर आते ही पहुत अच्छा अनुभव हुआ, मुझे पता नहीं था की हिंदी ब्लॉग भी इतना ज्यादा प्रचलित है. लिखता रहूँगा, यूँ ही उत्साह वर्धन करते रहियेगा.

  9. Asit Katyayan Says:

    Sir,
    By chance I saw your blog and I Should say that I am elated to see it.
    Asit katyayan


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