कोशिश – राहुल कात्यायन
अक्टूबर 25, 2009
बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को
खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है
सम्मान मैं इतने झुके कि कायरी का भरम देने लगे
उस सर को, इज्ज़त से उठाने की ये कोशिश है
बरसों बंधा पड़ा था कई अँधेरे धोखों मैं,
उस इंसान को रौशनी मैं लाने कि ये कोशिश है
जिन हाथों पे भरोसा था तुम्हारा जाने को,
उन हाथों का जादू दिखाने की ये कोशिश है
– राहुल कात्यायन





जून 20, 2009 at 5:45 अपराह्न
राहुल कात्यायन ji ये कोशिश jaree rhnee chahiye. keval likhne men hi nhin KRNE (work)men bhi