छिपा हुआ सत्य – राहुल कात्यायन
November 2, 2009
दोस्तों, मैं एक पेड हूँ. नीम का एक विशाल पेड़. कई साल से यहाँ खडा रहने के बावजूद एक लम्बा सफर तय कर चुका हूँ. सही, सही तो उम्र का पता नहीं लेकिन वो बूढा जो मेरी छाया मैं टूटी खाट पर लेटा है, उससे करीब दस साल छोटा हूँ. आज मौसम ठीक नहीं है. बहुत तेज़ हवा चल रही है. मेरी टहनियों पर बने घोंसलों मैं बसेरा बनाने वाले पक्षी शायद डर रहे हैं. क्यों न डरें, कुछ भी तो हो सकता है इस आंधी तूफ़ान में.
इसी तरह की एक आंधी बहुत दूर से मुझे उड़ाती हुई यहाँ लायी थी. कितना डरा सहमा हुआ था मैं. होता भी क्यों नहीं, आखिर मैं था ही क्या. एक छोटा सा निरीह बीज. जिन्दगी कब ख़त्म हो जायेगी, इसका पता नहीं था मुझे. लेकिन फिर भी मन मैं एक इच्छा थी, जीने की इच्छा. पता नहीं क्यों, मुझे अहसास होता था कि मेरे अन्दर कुछ है जो बाहर आना चाहता है.
ईश्वर बहादुरों का साथ देता है !
सबसे पहले दोस्ती हाथ बडे मिटटी ने. अपने सीने से मुझे इस तरह लगाया जैसे माँ अपने बच्चे को चिपकाती है. मैंने देखा कि मेरे ऊपर कि परत खुल रही है और कुछ ही दिनों में मैं अंकुरित हो उठा.
बीज से पोधा बनने वालों मैं केवल मैं ही नहीं था. मेरे कई दोस्त भी मेरे आस पास थे. एक दिन हादसा हुआ. पास रहने वाली पालतू बकरी मेरे तीन दोस्तों को हज़म कर गयी. सारी रात मैं सो नहीं सका. लगता था कि मिटटी मैं मिलने और अंकुरित होने की सारी मेहनत बेकार गयी. सारी रात मैं ईश्वर से प्रार्थना करता रहा- ” हे ईश्वर, मैं जीना चाहता हूँ, विशाल बनना चाहता हूँ, अपनी छाया मैं लोगों की थकान दूर करना चाहता हूँ, अपने गुणों को बांटना चाहता हूँ.”
ईश्वर ने प्रार्थना सुनी और अगली सुबह चमत्कार हुआ. दस साल का एक लड़का मेरे पास आया और बहुत प्यार से मेरी तरफ देखने लगा. देखते देखते उसने मेरे चारों ओर ईंटो का घेरा बना दिया. ईश्वर ने मेरी रक्षा के लिए उसे भेजा होगा.
अब मैं चैन से रह सकता था.
दोस्तों, मेरी छाया मैं लेटा ये खांसता हुआ बूढा वही दस साल का बच्चा है. जब ये मेरी छाया मे लेटता है तो मेरे दिल को एक महान प्रसन्नता होती है.
हाँ, तो मैं ये कह रहा था की ईंट का घेरा लगने के बाद मुझे किसी बड़ी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा. थोडा बहुत पतझड़ - सावन, गर्मी- सर्दी तो लगा ही रहता है.
आज मुझे अपनी विशालता पर गर्व है. मुझे डराने वाले भेंड़ बकरियां अब मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं. और तो और, कई बार उन बददिमाग जानवरों को मेरे मजबूत तने से बाँध दिया जाता है. जब वे अपने मजबूत सर को बेबसी से मेरे तने पर रगड़ते हैं तो लगता है जैसे अपनी पुराणी धृष्टता पर पश्चाताप कररहे हैं.
मुझे याद आता है वो दिन जब मैं मिटटी मैं मिला था. मेरे साथ के कई बीजों ने मिटटी का आमंत्रण स्वीकार नहीं किया और अपनी कड़ी खाल के साथ दम तोड़ दिया. दोस्तों, नयी शक्ति के विकास के लिए पुराणी कड़ी परतों को तोड़ना ही पड़ता है.
आज कितनी ख़ुशी मिलती है मुझे – जब वैद्यराज औषध के लिए मेरी तःनिहिया ले जाते हैं. जब मेरी सूखी लकड़ियों से घरों के चूल्हे जलते है. हाँ ईश्वर, हाँ! यही चाहता था मैं.
मुझे मालुम है की मेरे दोस्त की तरह मैं भी बूढ़ा हो चला हूँ और एक दिन फिर से मिटटी मे मिल जाऊँगा लेकिन मैं मरूँगा नहीं.
किसी महात्मा के उपदेश और कवि ही ह्रदयस्पर्शी कविता की तरह मेरे बीज भी दूर दूर तक फैल चुके हैं और अंकुरित भी हो चुके हैं मैं फिर से जीयूंगा, मैं उनके अन्दर जीयूंगा क्योंकि सत्य कभी मरता नहीं है.
Rahul Katyayan, An Actor
November 1, 2009
Rahul Katyayan is a person who is passionate about medium of story- telling. It could be anything from movies, television or animation and he has working experience in all these fields. He keeps doing extensive research in the field of media and entertainment and knows a bit about everything from Hollywood to Bollywood.
After completing his graduation in computer science, he came to Bombay and tried his luck in film industry. He worked in almost 20 serials and one movie with reputed directors but because of some family pressure he left his journey midway and joined IBM course for software engineering. Later he joined Information Technology department of HDFC Bank but soon he realized that he is wasting his life working in a cubicle. He then started his animation company www.gesturegraphics.com and began working on animated movies. He is a successful entrepreneur but somehow he feels that this all is not his true calling.
Now from encouragement and support from his life-partner, he wants to walk on his journey once again and looking forward to work as an actor in challenging roles in the film industry.
Work Experience:
1. Theatre at college level and Bharti Kala Kendra, Delhi workshop.
2. Serials : Nanhi Udan ( played lead role), Raajneeti, Swabhimaan, Shaanti, Aparajita, Zameer , Caravan, Teacher etc.
3. Censor ( Movie by Dev Anand)
Hobbies :
He loves to watch good movies. “Godfather”, “A Beautifull Mind” ,” Face/ off” are his favorites from Hollywood. His recent favorite hindi movies are “ Lage Raho Mumnna Bhai”, “ Luck by Chance”, “Rock On” and “ Wednesday”. His favorite actors are Naseeruddin Shah, Om Puri, Pankaj Kapur, Al Pacino, Robert Di Nero, John Travolta and Clint Eastwood .Favorite actresses are Mallika Sherawat and Monica Belluci .
Rahul Katyayan also writes his blog on current issues at gesturegraphics.wordpress.com. These writing gives a fair idea about his views and personality.
Current Plans and Future Ambitions:
Rahul Katyayan made many contacts during his struggle period and now when he has decided to revive his career as an actor, he is looking forward to get some benefit from them. He is also applying in different production houses and hope that he will soon find a role to meet his challenge as an actor. Rahul Katyayan is a talented, ambitious and hard working person and once he makes a commitment, he puts all his efforts to come up with best results. If you have any suitable role for him, please contact immediately on +91 9819173417 or email id rahul_kat100@yahoo.co.in.
कोशिश – राहुल कात्यायन
October 25, 2009
बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को
खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है
सम्मान मैं इतने झुके कि कायरी का भरम देने लगे
उस सर को, इज्ज़त से उठाने की ये कोशिश है
बरसों बंधा पड़ा था कई अँधेरे धोखों मैं,
उस इंसान को रौशनी मैं लाने कि ये कोशिश है
जिन हाथों पे भरोसा था तुम्हारा जाने को,
उन हाथों का जादू दिखाने की ये कोशिश है
– राहुल कात्यायन
बाबा नीमकरोरी महाराज की परम पावन पुण्य तिथि पर मैं सभी भक्तों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ, ये महाराज जी की कृपा है की हम सब इस सुअवसर पर सम्मिलित होते हैं और उनकी कृपा का प्रसाद पाते हैं. हम सभी जानते हैं की महाराज जी कृपा की कोई सीमा नहीं है. जो जितनी अभिलाषा करता है, उतने ही बाबा कृपालु होते जाते हैं. जीवन के इन दुर्गम रास्तों मैं महाराज जी की कृपा एक दिशा निर्देश यन्त्र की तरह है जो हमें हमारी मंजिल पर पहुँचाने मैं हमारी मदद करती है. आवश्यकता है पूरे विश्वास और समर्पण की. कई बार मनुष्य भय और अविश्वाश के कारण इश्वर निर्दिष्ट मार्ग को छोड़ कर अपने खुद के रास्ते बनाने की कोशिश करता है और महामाया की दैवीय योजना को भंग करने का दंड उठाता है.
कई पुण्यो और आशिर्वाद के फलस्वरुप मिली ये प्रेरणाएं ही एक मानव के सच्चे मार्ग दर्शक हैं और मनुष्य को पूरे धैर्य, लगन और विश्वास के साथ ईश्वर के बताये मार्ग पर चलते जाना चाहिए. मार्ग मैं आई हर कठिनाई और परीक्षा मानव के व्यक्तित्व को उबारती और निखारती है. जिस तरह हनुमान जी राम का नाम लेकर समुद्र किनारे से छलांग लगा देते हैं और तब तक विश्राम नहीं लेते जब तक कि प्रभु काज पूरा नहीं हो जाता, उसी तरह का विश्वास हमें प्राप्त हो, इसी आशीर्वाद की आकांक्षा है. हनुमान जी ने प्रभु के सारे काम किये और श्री राम के प्रिय बने, उसी प्रकार हम भी अपने यज्ञ स्वरुप जीवन मैं सफल हों और अपने जीवन के उद्देश्यों को पूरा करें, बार बार महाराज जी से इसी आशिर्वाद की प्रार्थना है.
महाराज की कृपा मुझ पर और मेर परिवार पर सदा ही बनी हुई है और बाबा से मेरी यही प्रार्थना है की हमें कभी भी अपनी छत्रछाया से दूर न होने दें.
बार बार महाराज जी के चरणों मैं मेरा प्रणाम!!!!!!
नीम करोरी बाबा
May 10, 2009
नीम करोरी बाबा आधुनिक भारत के एक महानतम संत थे. वैसे तो बाबा हिन्दू थे लेकिन उनके भक्त हर मजहब, प्रांत और जाति से ताल्लुक रखते थे. सही मायने मैं बाबा उस महान भारतीय परंपरा का प्रतिनिधित्व करते थे जो एक ईश्वर और उसके कई रूपों मैं विश्वास करती है.
नीम करोरी बाबा जिन्हें उनके कई भक्त महाराज जी के नाम से भी बुलाते थे, आगरा के पास एक छोटे से गाँव अकबरपुर मैं पैदा हुए थे. बाबा ने अपनी साधना का बहुत बड़ा काल फर्रुखाबाद के पास एक गाँव ” नीम करोरी” मैं बिताया था और वहीँ से उनका नाम नीम करोरी बाबा पड़ गया.
बाबा ने अपने जीवन काल मैं कई सारे आश्रम बनाये और हर आश्रम मैं हनुमान जी की स्थापना की. बाबा हनुमान चालीसा और सुन्दर काण्ड के पाठ को विशेष महत्व देते थे और अपने भक्तों को अधिक से अधिक पाठ करने को प्रोत्साहित करते थे. बाबा के संकल्प से बने आश्रमों मैं परिक्रमा मार्ग पर बना वृन्दावन का हनुमान आश्रम, लखनऊ का हनुमान सेतु आश्रम, कैंची का आश्रम और कानपुर का पनकी आश्रम मुख्य है.
बाबा के वृन्दावन आश्रम का महत्त्व इसलिए भी है क्योंकि बाबा ने अपनी देह वृन्दावन मैं ही त्यागी थी और यही आश्रम बाबा का समाधी स्थल भी है. कहते है कि इस आश्रम मैं आकर बाबा के चरणों में की हुई हर सच्ची प्रार्थना स्वीकार होती है. अनंत चतुर्दशी के दिन बाबा ने अपनी देह त्यागी थी, यह दिन बाबा के भक्तो में महानिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस अवसर पर वृन्दावन आश्रम में एक विशाल भंडारे का आयोजन होता है. वैसे तो बाबा के आश्रम में प्रतिदिन ही भण्डारा चालू रहता है. आश्रम में खाने के समय आने वाले हर भक्त को प्रसाद के तौर पर भोजन पाना अनिवार्य है और बाबा के उस प्रसाद का स्वाद ऐसा होता है जो दिमाग में रच बस जाता है.
बाबा कि कुटिया में हनुमान चालीसा पड़ने का एक विशेष महत्व है. बाबा को हनुमान चालीसा सुनना बहुत पसंद है और जो भक्त उन्हें हनुमान चालीसा पड़ कर सुनाते है, वो बाबा की कृपा का प्रसाद पाते हैं.
यदि आप घर बैठे बाबा के वृन्दावन आश्रम के दर्शन करना चाहते हैं तो कृपया नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कीजिये…
http://samadhi.neebkaroribaba.com/vrindavan.htm
वैसे मेरी सलाह तो यही होगी की इन छुट्टियों में आप सपरिवार हो ही आइये. जैसा कि मैंने पहले भी बताया, बाबा के वृन्दावन आश्रम का महत्त्व इसलिए भी बढ जाता है क्योंकि बाबा का समाधि स्थल इसी स्थान पर है.
इस लेख को बाबा के चरणों में समर्पित करते हुए प्रार्थना करता हूँ..
जा पर कृपा दृष्टि तुम करहु
रोग, शोक, दुःख, दारिद्र्य हरउ
त्राहि त्राहि में शरण तिहारी
हरउ सकल मम विपदा भारी
जय, जय, जय श्री भगवंता
तुम हो साक्षात् हनुमंता
बिनु हरी कृपा मिले नहीं संता
सो करी कृपा करें दुःख अंता
संघर्ष और जिद
May 6, 2009
मैं जानता हूँ कि इस घुप अंधेरे के पीछे कहीं मेरा सूरज छिपा है
बस अभी आजाएगा रौशनी फैलाते हुए
मुझे मालुम है कि इस तपते रेगिस्तान के पास कहीं, एक नदी का हरा भरा किनारा है
बस अभी महसूस होगा, हवाएं ठंडी बहाते हुए
मेरे ये हताश, निराश कदम एक छलावा हैं खुद मेरे ही लिए
मैं पाया था खुदको, कल अपनी ही हंसी बनाते हुए
पहला शेर – राहुल कात्यायन
May 6, 2009
मैं क्यों हारूँगा किस्मत से
जबकि मुझे ये ऐतबार है
मेरी हर हार मैं छिपी
खुदा तेरी भी हार है
This is movie for American students who wants to know more about the students of their age from different part of world. Rahul Katyayan scripted, shot and directed this movie for GestureGraphics.com. Movie is produced by Go Global Education.











